आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बैंक एजुकेशन लोन देने से मना नहीं कर सकते। एजुकेशन लोन के बारे में केरल हाइकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है । माननीय उच्च न्यायालय ने बैंकों से स्पष्ट कहा है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बैंक एजुकेशन लोन देने से मना नहीं कर सकते।

माननीय उच्च न्यायालय ने आगे कहा कि ऋण न चुका पाने की पूर्व आशंका से आप होनहार विद्यार्थियों को एजुकेशन लोन देने से मना नहीं कर सकते । न्यायालय ने याचिकाकर्ता को तुरंत ऋण प्रदान करने का भी आदेश दिया ।
विवाद क्या था ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने आयुर्वेद में उच्च शिक्षा के लिए ऑल इंडिया रैंकिंग के आधार पर प्रवेश सूची में स्थान पाया था । उसके बाद पढ़ाई के लिए बैंक में रु. 7.50 लाख तक के लोन का आवेदन दिया था । लेकिन बैंक ने उसका आवेदन नामंज़ूर कर दिया। कारण यह बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह बैंक का लोन नहीं चुका पाएगी ।
स्कीम के अनुसार रु.7.50 लाख तक के लोन में किसी गारंटी या सेक्युर्टी का प्रविधान नहीं है ।
यह बात सही है कि याचिकाकर्ता के पिता एक छोटे कारोबारी है और उनका यह छोटा बिजनेस भी कोरोनाकाल में बंद हो गया ।
अदालत ने अपने निर्णय में बैंक को तत्काल लोन देने का आदेश दिया । अदालत ने यह भी कहा कि बैंक का यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कार्यान्वित शिक्षा ऋण योजना की मूल भावना और उद्देश्य के ही विपरीत है।
न्यायालय ने यह निर्णय दिया:
माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता को तुरंत ऋण प्रदान करने का आदेश दिया । माननीय न्यायालय ने आगे कहा कि इस तरह से तो एजुकेशन लोन का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा । जस्टिस पी बी सुरेश कुमार की एकल पीठ उपर्युक्त निर्णय सुनाया।
माननीय न्यायालय के अनुसार , रिजर्व बैंक की शिक्षा ऋण योजना की मूल भावना ही यही है कि धन की कमी से कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी उच्च शिक्षा से बंचित न रहे।
एजुकेशन लोन के मामले में बैंक को विद्यार्थी की वर्तमान आर्थिक स्थिति नहीं , अपितु भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए।
आशा करनी चाहिए कि मेरे बैंकर साथी इस निर्णय को सार्थक रूप में ग्रहण करेंगे। उन्हें होनहार, मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की भावी प्रगति में सहयोगी बनना चाहिए । कमजोर आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी विद्यार्थी के एजुकेशन लोन को मना करना अब भारी पड़ सकता है।

Very good and positive decision of the court.