
केंद्र सरकार बैंकों और डाकघर के डिपॉजिट खातों में नामांकित व्यक्तियों की संख्या वर्तमान 1 से बढ़ाकर 4 तक करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में बैंकिंग कानून में आवश्यक संशोधन के लिए एक विधेयक शीघ्र ही संसद में लाये जाने की संभावना है।
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2 अगस्त 2024 को केंद्र सरकार की कैबिनेट की बैठक में बैंकिंग , म्यूचुअल फ़ंड और बीमा आदि क्षेत्र से जुड़े कई विषयों में आवश्यक संशोधन पर विचार किया गया। बैंकों में नामांकित व्यक्तियों की संख्या बढ़ाकर 4 तक करने के पीछे उद्देश्य यह बताया गया है कि जमाकर्ता और नामांकित दोनों की मृत्यु हो जाने पर उसके परिजनों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सके। इसके लिए एक से अधिक व्यक्तियों को नामांकित करने की सुविधा दी जाएगी।
सरकार इस बात से भी चिंतित बताई जाती है है कि इस समय रु. 78,000 करोड़ से अधिक की राशि बैंकों में पड़ी है, जिसका कोई दावेदार नहीं है । इसके कई कारण हो सकते हैं-जैसे, जमाकर्ता की मृत्यु हो जाना, उसके परिजनों को इसकी कोई जानकारी न होना अथवा कानूनी वारिसों का शहर अथवा देश छोड़कर अन्यत्र निवास करना।
हमारे देश में परिजनों के मध्य वित्तीय सूचनाओं का आदान-प्रदान न होना भी एक कारण हो सकता है। अनेक मामलों में माता -पिता अपने बच्चों से छिपाकर बैंक में बचत करते हैं ताकि संकट की घड़ी में उन्हें किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। कई बार जमाकर्ता , बैंक मैनेजर के पास इस बात की तसल्ली करने आते हैं कि उनके पति या पत्नी को इस रकम की जानकारी नहीं होनी चाहिए।
कुछ वर्षों पूर्व इस दिशा में एक कदम यह उठाया गया था कि खाते में नामांकन किया गया है या नहीं, इसकी जानकारी बैंक की पासबुक और स्टेटमेंट में हाँ/नहीं में प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई। यदि जमाकर्ता स्पष्ट रूप से लिखकर दे, तो नामांकित व्यक्ति का नाम भी पासबुक में प्रिंट किया जा सकता है। लेकिन इन कदमों से भी स्थिति में कोई विशेष परिवर्तन हुआ हो, ऐसा नहीं लगता।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ऐसी राशि के विषय में एक विशेष पोर्टल भी विगत वर्ष प्रारम्भ किया गया है। उम्मीद करनी चाहिए कि इन कदमों से निकट भविष्य में दावारहित धन राशि में कमी आएगी और उसे उसके असली हकदारों तक पहुंचाया जा सकेगा।
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यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह भी है की भारत में बैंकों , डिमेट , म्यूचुअल फ़ंड और बीमा उद्योग में नामांकन के विषय में व्यवस्था भिन्न-भिन्न है। जहां म्यूचुअल फ़ंड 3 व्यक्तियों तक नामांकन की सुविधा देते हैं , वहीं जीवन बीमा कंपनियों में वरीयता क्रम के आधार पर नामांकितों की श्रेणियाँ बनाई गई हैं। संभतः कानून में संशोधन के जरिये बैंकिंग में भी इन सभी के गुण-दोष के आधार पर नामांकित व्यक्तियों का वरीयता क्रम बनाया जाएगा।
