भूमिका :

वित्त में एक सिद्धांत है, जो छोटी बचत को दौलत में बदल सकता है । उसका नाम है चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति.

अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार इसे “दुनिया का आठवां आश्चर्य” कहा था और इसके पीछे ठोस कारण भी है.

चक्रवृद्धि ब्याज केवल एक वित्तीय शब्द नहीं है, यह एक पूंजी-सृजन  इंजन है. यह पृष्ठभूमि में चुपचाप काम करता है.

आइए, इसे सरल शब्दों में समझते हैं।

चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति क्या है ?

मूल रूप से, चक्रवृद्धि ब्याज का अर्थ है- न केवल आपके मूल निवेश पर, बल्कि उस निवेश से मिलने वाले लाभ  पर भी लाभ  अर्जित करना . इससे एक ठोस और गतिशील आधार  पैदा होता है.

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समय बीतने के साथ आपका पैसा बढ़ता रहता है। आइए इसे एक उदाहरण से समझते  हैं –

यदि आप 10% वार्षिक रिटर्न पर ₹1,00,000 का निवेश करते हैं, तब 1 वर्ष के बाद, आपके पास ₹1,10,000 होंगे.

2 साल पूरे होने पर , ₹1,10,000 आपका मूल धन माना जाएगा, जिस पर ब्याज के साथ आपकी राशि ₹1,21,000 हो जाएगी.

यदि आप 20 साल तक निवेश जारी रखें , तब आपका  ₹1 लाख का मूल निवेश बढ़कर ₹6.7 लाख से ज़्यादा हो जाएगा.

यही चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति है, जिसे चक्रवृद्धि ब्याज का जादू कहा जाता है

चक्रवृद्धि ब्याज इतना प्रभावशाली क्यों है?

1. समय ही चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति का राज़ है: 

जितनी जल्दी शुरुआत की जाए, आपकी संपत्ति उतनी ही ज़्यादा होगी.

अगर छोटे-छोटे निवेशों को भी पर्याप्त समय दिया जाए, तो वे बड़े निवेश में बदल सकते हैं.

2. चक्रवृद्धि ब्याज निरंतरता को पुरस्कृत  करता है:

नियमित निवेश, चाहे वे छोटे ही क्यों न हों, समय के साथ काफ़ी बढ़ते हैं. दूसरी ओर, निवेश छोड़ने से चक्रवृद्धि ब्याज की श्रृंखला टूट जाती है.

3. यह चुपचाप काम करता है:

शुरुआती कुछ सालों में कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आएगा. लेकिन एक-दो दशक बाद, आंकड़े चौंकाने वाले होने लगते हैं, जो निवेशक के चेहरे पर खुशी ला देते हैं.

4. यह मुद्रास्फीति से बचाता है

चक्रवृद्धि ब्याज हमारी संपत्ति को जीवन-यापन की बढ़ती लागत की तुलना में तेज गति  से बढ़ने में मदद करता है बशर्ते, हम समझदारी से निवेश करें.

आइए दो सहेलियों  का उदाहरण लेते हैं:

  • सीता 25 साल की उम्र में ₹5,000 प्रति माह निवेश करना शुरू करती है.
  • उसकी सहेली गीता, जिसकी आयु 35 वर्ष है, वह  भी  ₹5,000 प्रति माह से निवेश प्रारम्भ  करती है.
  • दोनों 55 साल की उम्र तक निवेश जारी  रखती  हैं अर्थात सीता के लिए 30 साल, गीता के लिए निवेश की अवधि 20 साल है. 
  • हम यह मान लेते हैं, की दोनों सहेलियों को 12% की दर से ब्याज का लाभ मिलता है.
  • 55 साल की उम्र में सीता की कुल संपत्ति होगी  ₹1.76 करोड़, लेकिन गीता की कुल संपत्ति मात्र   ₹49.96 लाख ही होगी. 

यह देखा जा सकता है कि, यद्यपि  गीता ने 20 साल के लिए निवेश किया था, सीता की जल्दी शुरुआत ने उसे केवल 10 अतिरिक्त वर्षों में तीन गुना अधिक संपत्ति दी. यही चक्रवृद्धि ब्याज का जादू है.

चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति की शक्ति का लाभ कैसे उठाएं?

जल्दी शुरुआत करें:

सही समय का इंतज़ार न करें. निवेश का सबसे अच्छा समय कल था, दूसरा  सबसे अच्छा समय आज है.

निरंतर निवेश करें:

निवेश को एक मासिक खर्च की तरह समझें, न कि एक वैकल्पिक गतिविधि की तरह.

बेहतर होगा कि पहले निवेश करें, फिर शेष राशि से अपने खर्चों का प्रबंध करें।

कमाई का पुनर्निवेश करें:

निवेश में बने रहें , बीच में निकालने से बचें—उसे बढ़ने दें।

धैर्य रखें:

चक्रवृद्धि ब्याज रातों रात धन कमाने का उपाय नहीं है, अपितु  धीमी, स्थिर और गुणात्मक वृद्धि प्राप्त करने का  सिद्धांत  है.

उतार-चढ़ाव से परेशान न हों:

बाजार के उतार-चढ़ाव से परेशान न हों. जब बाजार में गिरावट हो रही हो, तो निवेश की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.

निष्कर्ष:

चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति हमें दो सुनहरे सबक सिखाती है-

जल्दी शुरुआत करें और निवेशित रहें.

अगर पर्याप्त समय दिया जाए, तो हमारे छोटे, लेकिन  नियमित निवेश भी अकल्पनीय संपत्ति बना सकते हैं.

इसलिए, चाहे म्यूचुअल फंड हों, स्टॉक हों या सेवानिवृत्ति बचत, चक्रवृद्धि ब्याज को अपने लिए काम करने दें.

हमें याद रखना चाहिए कि पैसा इत्तफाक  से नहीं, बल्कि हमारी  इच्छा शक्ति  से बढ़ता है. 

जल्दी और लगातार निवेश करने का फैसला सबसे समझदारी भरा फैसला है जो हम कर सकते हैं।

One response to “चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति को पहचानिए !”

  1. […] में चक्रवृद्धि ब्याज (कम्पाउंडिंग) का सिद्धांत काम करता […]

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