( Difference between Credit , Loan & Cash- Credit )

अनेक बार हम क्रेडिट, लोन और कैश-क्रेडिट में क्या अन्तर है , यह न समझते हुए इन शब्दों को पर्यायवाची के रूप में प्रयोग कर लेते हैं । वास्तव में , क्रेडिट बहुत व्यापक शब्द है , जिसका शाब्दिक अर्थ होता है , ‘उधार’। लोन जिसे हम प्रायः ऋण या कर्ज भी कहते हैं , क्रेडिट का एक प्रकार है। लोन के अतिरिक्त, क्रेडिट के अन्य प्रकार भी हैं , जैसे कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बिल डिस्कौंटिंग बगैरह।

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जैसा मैंने पहले कहा कि क्रेडिट बहुत व्यापक शब्द है, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार इस शब्द का प्रयोग अलग-अलग संदर्भों में किया जाता है । जैसे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर जब क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा करते हैं, तो उसे आम बोलचाल में ऋण या कर्ज नीति कह दिया जाता है। कुछ भाषाशास्त्री उसे साखनीति भी कहते हैं । यहाँ ऋण शब्द भी क्रेडिट की तरह अपने सीमित दायरे को तोड़कर व्यापक रूप धारण कर लेता है।

जब हम किसी व्यक्ति की क्रेडिट की बात करते हैं , तब इसका मतलब व्यक्ति की साख (credit- worthiness) से होता है। दूसरे शब्दों में इस शब्द से हमें बाज़ार में उसकी हैसियत का पता चलता है ।

लोन की विशेषताएँ :

(Features of a Loan):

लोन की विशेषता है कि इसे आप हमेशा के लिए नहीं ले सकते । एक समय-सीमा में इसे ब्याज सहित लौटाना ही होता है। ऋण खाते को बंद करना आवश्यक है। ऋण चुकाने के लिए किश्तों में भुगतान करना होता है ।

किश्तें आपके व्यवसाय या लोन की स्कीम के अनुसार निर्धारित की जाती हैं । ये मासिक, तिमाही , अर्ध-वार्षिक अथवा वार्षिक भी हो सकती हैं । एक उदाहरण लेते हैं – यदि आपने पर्सनल लोन लिया है , तो आप उसकी मासिक किश्तों का भुगतान करते हैं । ऐसा इसलिए, क्यूंकि आपकी आमदनी या वेतन हर महीने आपके बैंक खाते में जमा हो रहा है।

टर्म लोन या मियादी ऋण (Term Loan):

टर्म लोन क्या है, इसे एक अन्य उदाहरण से समझते हैं । मान लीजिये कि आप एक कोल्ड स्टोर लगाने के लिए टर्म लोन या मियादी ऋण लेते हैं , जिसे आपको सात वर्ष में लौटाना है ।

इस मामले में आपकी किश्तें अर्ध-वार्षिक अथवा वार्षिक हो सकती हैं। ऐसा इसलिए कि आपके कोल्ड स्टोर में जो माल रखा जाएगा , वह 6 से 8-9 महीने तक स्टोर में रहेगा। आपको किराया भी तभी मिलेगा ।

चूंकि किराया आपको हर माह नहीं मिल रहा है , इसलिए किश्तें भी मासिक नहीं हैं। सभी किश्तों का भुगतान हो जाने पर आपका लोन खाता बंद कर दिया जाएगा ।

लोन की एक विशेषता यह है कि एक बार किश्त जमा कर देने पर आप उसे निकाल नहीं सकते। इसीलिए लोन खाते में चेकबुक भी नहीं दी जाती ।

अभी तक हमने जाना कि लोन क्या होता है । अब हम यह जानेंगे कि कैश क्रेडिट क्या है । इसके बाद लोन और कैश क्रेडिट के अन्तर को समझने का प्रयास करेंगे।

कैश क्रेडिट और उसकी विशेषताएँ:

(Cash Credit & its Features)

अब कैश क्रेडिट अकाउंट का उदाहरण लेते हैं । कैश क्रेडिट में आपके व्यवसाय की जरूरत के हिसाब से एक निश्चित क्रेडिट लिमिट निर्धारित कर दी जाती है ।

आपको क्रेडिट लिमिट के अंदर कैश क्रेडिट खाते को चलाने की छूट होती है । शर्त यह है कि आपको व्यवसाय से जो भी आय होगी, वह आप कैश क्रेडिट खाते में जमा करेंगे ।

कैश क्रेडिट खाते में आपको चेकबुक दी जाती है । आप चेक के जरिये पैसा निकाल सकते हैं । अपनी कारोबारी खर्चों के लिए चेक से भुगतान भी कर सकते हैं ।

ध्यान दीजिये कि लोन खाते में एक बार किश्त जमा करने के बाद उसे दोबारा निकालने की सुविधा नहीं होती । यही कारण है कि लोन खाते में चेकबुक नहीं दी जाती है ।

कैश क्रेडिट खाते में आप द्वारा उपयोग की गई राशि पर आपको हर माह ब्याज जमा करते रहना होगा। निर्धारित लिमिट के अंदर आप कितनी भी बार पैसा निकाल सकते हैं।

जब आपको जरूरत न हो, तब अतिरिक्त धनराशि जमा भी कर सकते हैं । इससे आपको ब्याज की काफी बचत हो जाती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि आप केवल उतनी ही धनराशि पर ब्याज का भुगतान करेंगे जो आपने इस्तेमाल की है । ब्याज भी उतने दिन का ही लगेगा जितने दिन पैसा आपके पास रहा ।

अभी तक हमने जाना कि क्रेडिट , लोन और कैश क्रेडिट में क्या अन्तर है ।

कैश क्रेडिट और ओवरड्राफ्ट खाते में अन्तर : (Difference between Cash Credit & Overdraft):

आइये, अब कैश क्रेडिट और ओवरड्राफ्ट खाते में अन्तर को समझते हैं। इन दोनों में काफी समानताएँ हैं । दोनों ही में आपको आपकी प्रतिभूति (security ) की वैल्यू के आधार पर पैसा खर्च करने की सुविधा दी जाती है। दोनों में ही चेकबुक भी जारी की जाती है । इससे आप पैसा निकाल सकते हैं या किसी को भुगतान कर सकते हैं ।

अन्तर यह है कि कैश क्रेडिट सुविधा केवल कारोबार को चलाने के लिए ही दी जाती है । इसे आप अपनी दुकान या बिजनेस के लिए माल भरने के लिए खर्च कर सकते हैं । यदि आपकी कोई निर्माण इकाई है, तो कैश क्रेडिट की रकम से आप कच्चा माल खरीद सकते हैं ।

इसके अतिरिक्त रोज़मर्रा के बिजनेस संबंधी खर्चों जैसे बिजली का बिल भरने आदि के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं । बैंकिंग की भाषा में इसे कार्यशील पूंजी (Working Capital) कहा जाता है ।

महत्वपूर्ण यह है कि कैश क्रेडिट की स्वीकृत सीमा को आप अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते ।

ओवरड्राफ्ट सुविधा, कारोबारी जरूरतों के अलावा व्यक्तिगत जरूरतों के लिए भी दी जाती है। इसमें प्रतिभूति के रूप में आप अपनी कोई प्रॉपर्टी , फ़िक्स्ड डिपॉजिट या शेयर इत्यादि दे सकते हैं । स्वीकृत ओवरड्राफ्ट सीमा का उपयोग आप अपनी आवश्यकतानुसार करने के लिए स्वतंत्र हैं ।

निष्कर्ष (Conclusion ):

हमने जाना कि क्रेडिट, लोन, कैश क्रेडिट और ओवरड्राफ्ट , में क्या अन्तर है । किस व्यक्ति के लिए क्या उपयुक्त है, यह उसकी जरूरत और व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर निश्चित किया जाता है ।

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