-राजीव पाठक
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण अनेक व्यापारियों के धंधे बंद हो गए हैं या फिर वे आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ये व्यापारी बैंक वालों की डांट –फटकार से बचने के लिए बैंक में जाने से कतराते हैं । वे बैंकरों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। आज हम ऐसी ही स्थितियों की चर्चा करेंगे और आपको यह बताएँगे कि यदि कोरोना के कारण आपका धंधा बैठ गया है, तो आपको क्या उपाय करने चाहिए।

बैंक से संपर्क बनाए रखें :
Remain in touch with your bank
हिन्दी में एक कहावत है कि दाई माँ से पेट नहीं छुपाते। कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि डॉक्टर से बीमारी नहीं छुपानी चाहिए । यही बात आपकी आर्थिक कठिनाइयों के विषय में भी लागू होती है।
यदि आप या आपका व्यवसाय किन्हीं परिस्थियोंवश आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं , तो सबसे पहला काम यह करिए कि अपने बैंक से संबंध बनाए रखिए। उनकी फोन कॉल का जवाब दीजिये। उनसे नजरें मत चुराइए । आवश्यकता होने पर बैंक जाने से परहेज मत करिए।
बैंक को अपना मित्र समझिए :
Be honest with your bank :

बैंक को अपना मित्र समझिए । बैंक अधिकारियों के समक्ष अपनी परेशानी ईमानदारी से रखिए । महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर आप अपना ही नुकसान करेंगे।
वास्तव में लोग इसका उल्टा करते हैं । एक बार लोन अकाउंट खराब हुआ नहीं, कि वे बैंक वालों से नजरें चुराने लगते है। उनके फोन काल का उत्तर नहीं देते। बैंक वाले मिलने को वुलाते हैं, तो जवाब देते है कि सर , आज तो मैं बाहर हूँ । कल आता हूँ। कल कहते हैं कि दादी बीमार हैं। एक-दो दिनों में आता हूँ। उसके बाद नया बहाना होता है और ऐसे बहानों की कोई सीमा नहीं होती।
ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि ऐसा कर वे केवल अपना ही नुकसान कर रहे होते है। तो दूसरा सूत्र है कि अपने बैंक से ईमानदारी से पेश आइये । उनके फोन कॉल का उत्तर दीजिये। नियत समय पर बैंक जाकर अपनी समस्या के विषय में बैंक अधिकारियों से बात कीजिये । इससे बैंक वालों का आपके प्रति विश्वास बना रहेगा। इसका लाभ आपको यह होगा कि वे आपकी सहायता करने के लिए कोई न कोई तरीका अवश्य निकाल लेंगे। बैंक को अपना मित्र मानिए। एक ऐसा मित्र जो बुरे समय में आपको न सिर्फ आर्थिक सहायता दे सकता है, बल्कि सही परामर्श और मार्गदर्शन भी दे सकता है।
अतिरिक्त लोन हमेशा ही समाधान नहीं होता : Additional loan is not always a solution :
आम और पर लोग यह मानते हैं कि यदि आपका व्यवसाय ठीक नहीं चल रहा है, तो बैंक से संपर्क करेंगे और अतिरिक्त धन की मांग रखेंगे । यह उपाय कभी–कभी जरूरी हो सकता है, लेकिन हमेशा यही उपाय काम करेगा , यह आवश्यक नहीं है।
बैंक अधिकारियों से अपने सम्बन्धों का उपयोग केवल अतिरिक्त लोन प्राप्त करने के लिए न करें । उनके साथ मीटिंग कर आपकी आर्थिक कठिनाइयों का सही कारण पता कीजिए ।

हो सकता है कि आपका पेमेंट कहीं फंस गया हो, ऐसे में यह संभव है कि बैंक अधिकारी आपका पेमेंट शीघ्र दिलवाने में आपकी कुछ सहायता कर सकें।
अनेक लोगों को यह बात अव्यावहारिक लगेगी। लेकिन यह संभव है। यदि देनदार पार्टी भी बैंक की ग्राहक है, तो बैंक मैनेजर के हस्तक्षेप का सार्थक प्रभाव हो सकता है। दूसरी स्थिति यह हो सकती है कि कि आप एक एमएसएमई आपूर्तिकर्ता हैं। आपका पेमेंट किसी सरकारी विभाग में रुका हुआ है। सरकार की इस विषय में स्पष्ट नीति है। यदि सही चैनल का उपयोग करें, तो सरकारी पेमेंट आपको शीघ्रता से मिल सकता है। यदि बैंक को ऐसा लगे कि आपकी आर्थिक परेशानी अस्थाई प्रकृति की है, तो वे आपको अस्थायी रूप से अतिरिक्त ऋण राशि उपलब्ध करने पर विचार कर सकते हैं।
अतिरिक्त पूँजी जुटाने के लिए उड़ान भरिए: Avail benefits of UDAAN for sub-debts :
यदि बैंक से बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि व्यापार में अतिरिक्त पूंजी लगाने की आवश्यकता है , तो भी बैंक आपकी मदद कर सकता है। भारत सरकार ने CGTMSE के सहयोग से उड़ान योजना ( Credit Guarantee Scheme for Subordinate Debts / CGSSD) प्रारम्भ की है। इस योजना के अंतर्गत आप अपने व्यवसाय में अतिरिक्त पूँजी लगाने के लिए सब- डैब्ट स्कीम का लाभ ले सकते हैं। इस योजना में ऋण प्राप्त करने के लिए आपको किसी अतिरिक्त सेक्युर्टी की आवश्यकता नहीं होगी। अपितु आप एक मामूली सी फीस का भुगतान कर CGTMSE की गारंटी योजना का लाभ लेकर बैंक ऋण के रूप में पूँजी जुटा सकते हैं।
दलालों से बचें :
Beware of touts :
आम तौर पर होता यह है कि लोग बैंक में स्वयं संपर्क नहीं करते और दलालों के चक्कर में पड़ जाते हैं। यहाँ मैं वित्तीय विवरणी तैयार करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर प्रश्न नहीं उठा रहा हूँ। वित्तीय विवरण तैयार करना उनका अपना कार्यक्षेत्र है और वे इसके विशेषज्ञ हैं। उनकी सेवाओं का लाभ अवश्य लिया जाना चाहिए। लेकिन यदि कोई कहता है कि मैं आपका काम करा दूंगा और मेरे फीस यह होगी तो सतर्क हो जाइए। बैंक प्रायः ऐसे लोगों और उनकी बात को महत्व नहीं देता। हाँ , अपवाद तो सभी जगह हो सकते हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक कहेंगे कि मैं आपका कर्ज माफ करवा दूँगा , तो मान लीजिये कि आपके साथ धोखा होने की पूरी संभावना है।
यदि कोरोना से धंधा बैठ गया है, तो करें यह उपाय :
अन्त में , हम ऊपर बताए गए उपायों पर संक्षेप में एक दृष्टि डालेंगे :
· अपने बैंक के संपर्क में रहें। बैंकर से नज़रें चुराने में आपका ही नुकसान है।
· आर्थिक कठिनाई के वास्तविक कारण का पता लगाएँ
· यदि आर्थिक कठिनाई अस्थाई प्रकृति की है, तो ब्याज या किश्त की रकम के भुगतान के लिए अतिरिक्त समय की मांग करे। इसे Loan Reschedule या लोन Restructuring
के जरिये किया जा सकता है।
· यदि ऐसा लगता है कि व्यवसाय को चालू रखने के लिए अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल आवश्यक है, तो उस दिशा में बात करिए। आप कुछ समय के लिए अस्थाई वर्किंग कैपिटल लिमिट की मांग कर सकते है।
· लेकिन यदि ऐसा लगता है कि खर्चों मे वृद्धि हो जाने से व्यवसाय को चलाने के लिए स्थायी रूप से अधिक वर्किंग कैपिटल आवश्यक है, तो उसका सही प्रॉजेक्शन करें और और लिमिट बढ़ाने की मांग बैंक के सामने रखें ।
· यदि बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि प्रोमोटर को अतिरिक्त पूँजी लाये विना व्यवसाय चालू रखना संभव नहीं है, तो ऊपर बताए गए उड़ान कार्यक्रम से जुड़िये और अतिरिक्त पूँजी लगाये।
· इन सभी उपायों पर चर्चा और विचारणा तुरंत करें। बेहतर तो यह होगा कि ऋण खाता, एनपीए में जाने से पूर्व समय रहते तत्काल उपाय किए जाएँ ।
आशा है कि आप यह समझ गए होंगे कि यदि कोरोना से धंधा बैठ गया है, तो आपको क्या उपाय करने चाहिए। यदि यह जानकारी आपको पसंद आई हो, तो दूसरों के साथ शेयर करें । अपनी टिप्पणी और सुझाव आप कोमेंट्स सेक्शन में दे सकते हैं, इससे आपके पसंद के विषयों पर लिखने में सुविधा होगी ।
