
चित्र सौजन्य: श्री जय प्रकाश नड़ड़ा Twitter Account
देश के वरिष्ठतम राजनेता और पूर्व उप-प्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारतरत्न से सम्मानित करने की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज की। भारत के अधिकांश लोग भले ही, वे भारतीय जनता पार्टी में हों, अथवा विपक्ष में, इस समाचार से प्रसन्न हैं।
मैं स्वयं भी इस समाचार से अभिभूत हूँ। आज मैं श्री लाल कृष्ण आडवाणी से जुड़ी कुछ स्मृतियाँ साझा कर रहा हूँ।
संभवतः 1989 की बात है। उन दिनों मैं बैंक ऑफ इंडिया के प्रधान कार्यालय में कार्मिक विभाग में पदस्थ था। प्रधान कार्यालय उन दिनों नरीमन पॉइंट स्थित ‘एक्सप्रेस टावर’ में हुआ करता था। भारत सरकार से आदेश प्राप्त हुआ कि अधीनस्थ विधान पर संसदीय समिति (Parliamentary Committee On Subordinate Legislation) केन्द्र सरकार के मुंबई स्थित बैंकों और अन्य उपक्रमों के प्रधान कार्यालयों के निरीक्षण के लिए आ रही है। समिति में कुल 11 सदस्य शामिल थे और उनके मुंबई में मेजवानी का उत्तरदायित्व हमारे बैंक को सौंपा गया था।
हमारे बैंक ने संसदीय समिति की मेजवानी के लिए एक टीम गठित की । प्रत्येक सांसद के एस्कॉर्ट के लिए अधिकारियों का चयन किया गया। सौभाग्य से मुझे श्री लाल कृष्ण आडवाणी के एस्कॉर्ट का दायित्व मिला। श्री आडवाणी उस समय राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे ।
श्री आडवाणी किसी निजी कार्य से अहमदाबाद में थे, वहाँ से गुजरात एक्सप्रेस से प्रातः लगभग 6 बजे मुंबई सेंट्रल स्टेशन पहुँचे। उनके आगमन से पूर्व मुंबई पुलिस के एक इंस्पेक्टर, जिन्हें श्री आडवाणी की सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया था , मुझे ढूंढते हुए पहुँचे। हम दोनों श्री आडवाणी की प्रतीक्षा रेल्वे प्लैटफ़ार्म पर करने लगे। खैर, ट्रेन निर्धारित समय पर आ गई और हमें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी।
ट्रेन से आडवाणी के साथ उनके पुत्र भी उतरे। श्री आडवाणी ने बेटे का परिचय हम लोगों से कराया । उसके बाद उनके बेटे टैक्सी लेकर अपने गंतव्य की ओर चले गए। (अपने परिवार को आधिकारिक आवभगत से दूर रखने का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।)
हम लोग श्री आडवाणी के साथ मुंबई सेंट्रल रेल्वे स्टेशन के मुख्य द्वार पर प्रतीक्षारत अपनी टैक्सी के पास आ गए । वह एंबेसडर गाड़ी थी । आडवाणी जी पीछे की सीट पर लेफ्ट साइड में बैठ गए। उसके बाद मैं स्वयं पुलिस अधिकारी के साथ आगे की सीट पर बैठने के लिए जाने लगा, आडवाणी जी ने मुझे कहा कि आप यहाँ मेरे साथ बैठिए। मैं उनके दाई ओर बैठ गया।
उनके ठहरने की व्यवस्था कफ परेड स्थित एक होटल में की गई थी। रास्ते में उन्होने मुझसे मेरा पूरा परिचय जाना, जैसे कहाँ के हो , मुंबई में कब से हो, किस पोस्ट पर हो, आगे कैरियर पाथ क्या है आदि-आदि । मेरे पिताजी का नाम भी पूंछा। जब मैंने बताया, तो उन्होने कहा कि “नाम जाना-पहचाना लगता है, वे शायद संघ में रहे हैं ।“ मेरी स्वीकारोक्ति के बाद तो हमने राजनीतिक विषयों पर भी खुल कर बात की।
कार्यक्रम के अनुसार, बैंक ऑफ बरोदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया के अलावा हम लोग मुंबई पोर्ट ट्रस्ट , ओएनजीसी इत्यादि के निरीक्षण हेतु गए। समीक्षा बैठकों में संबंधित संस्थान के चेयरमैन और अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित रहे। एक दिन ओएनजीसी की समुद्र से तेल निकालने वाली इकाई ‘बॉम्बे हाई’ के लिए रखा गया। वहाँ जाने के लिए जुहू एयरपोर्ट से पवनपुत्र हेलीकाप्टर की व्यवस्था की गई थी, जिसमें लगभग 5 घंटे व्यतीत हुए।
अपने मुंबई प्रवास के दौरान समय निकाल कर वे अपने सगे संबंधियों के माहिम और चर्चगेट स्थित घरों पर भी गए। मैंने कहा कि आप मिल कर आइये, मैं गाड़ी में इंतजार करता हूँ, लेकिन वे नहीं माने । मुझे न सिर्फ अपने साथ ले गए अपितु अपने सगे-संबंधियों से मेरा परिचय अत्यंत सम्मानपूर्ण ढंग से कराया। चाय-नाश्ता भी कराया । इससे उनके बड़प्पन और मानवतावादी होने का अहसास होता है।
उनके साथ ही मैंने मुंबई एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज को पहली बार देखा। उन दिनों मोबाइल नहीं होते थे , इसलिए वीआईपी लाउंज का एसटीडी फोन बहुत काम आया , जहां से वे अपने दिल्ली पहुँचने की सूचना पार्टी के उस समय के महामंत्री श्री कृष्ण लाल शर्मा को दे सके। विदा होते समय वे बहुत प्रसन्न थे और नई दिल्ली स्थित अपने आवास का पता देते हुए मुझे आने का न्यौता भी दिया।
मैं श्री आडवाणी जी के व्यवहार से बहुत प्रभावित था। कोई अनुचित मांग नहीं । उनकी आवश्यकताओं की बात करूँ, तो उन्हे पढ़ने के लिए सभी अख़बार चाहिए, जिनमें फ्री प्रैस जर्नल अनिवार्य है। एकदम सादा जीवन। खाने-पीने के मामले में बहुत ही अनुशासित, व्यवहार में शालीन, और मृदुभाषी , ऐसा आजकल देखने को कहाँ मिलता है।
श्री लालकृष्ण आडवाणी वास्तव में एक ‘रत्न’ हैं, सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित कर एक प्रशंसनीय कार्य किया है। सरकार का साधुवाद और आदरणीय आडवाणी जी को बधाई।
